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There is no heat in Rajasthan, people here were hot | ‘बाबर शक्तिशाली था तो राजस्थान पर कब्जा…

राजस्थानी युवा समिति के राष्ट्रीय सलाहकार और शिक्षाविद राजवीर सिंह चलकोई ने कहा- अगर बाबर इतना शक्तिशाली था और भारत पर विजय प्राप्त करना चाहता था, तो उसने राजस्थान पर कब्जा क्यों नहीं किया? बाबर ने खुद लिखा कि राजस्थान में गर्मी बहुत होती है, इसलिए व

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इस पर चकलोई ने कहा कि राजस्थान में गर्मी नहीं, बल्कि यहां के लोग ज्यादा गर्म थे। हमें इतिहास का वो पक्ष ही पढ़ाया गया जिसमें केवल हार और पराजय थी। लेकिन हमारी विजयों, बलिदानों और संघर्षों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ऐसे विकृत इतिहास को चुनौती दी जाए और नई पीढ़ी को सच्चा इतिहास बताया जाए। चलकोई चित्तौड़गढ़ में चित्तौड़ गाथा कार्यक्रम में आए थे।

सपा सांसद के बयान का विरोध

यहां उन्होंने स्टूडेंट्स और कार्यक्रम में आए प्रबुद्धजनों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा संसद में दिए गए बयान पर बात की। चलकोई ने कहा- महाराणा सांगा ने जिन जगहों पर युद्ध लड़े, वे सभी चित्तौड़ से सैकड़ों किलोमीटर दूर थीं। इससे साफ होता है कि वह सिर्फ अपनी रियासत की नहीं, बल्कि पूरे भारत की रक्षा के लिए लड़े।

500 किमी दूर जाकर राजा की बैंड बजा दी

चलकोई ने कहा- इतना दूर जाकर लड़ाई लड़ने वाला योद्धा बाबर को युद्ध में साथ पाने के लिए भारत बुलाएगा, यह बात तर्क और समझ दोनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिस राजा ने 500 किलोमीटर दूर जाकर किसी अन्य राजा की बैंड बजा दी है, वह बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बुलाएगा, यह बात हजम नहीं होती। यह बयान बिना ऐतिहासिक जानकारी के दिया गया है और इस तरह के गंभीर और तथ्यहीन बयान संसद जैसे मंच पर नहीं दिए जाने चाहिए।

कार्यक्रम में चलकोई को सुनने के लिए स्टूडेंट्स भी आए थे।

चलकोई बोले- सांगा पूरे देश के लिए लड़े

राजवीर सिंह चकलोई ने कहा- हम मानते हैं कि इतिहास को हर पक्ष से देखना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बिना पढ़े और बिना तथ्यों के कुछ भी कह दिया जाए। उन्होंने कहा कि महाराणा सांगा ने जिन जगहों पर युद्ध लड़े, वे सभी चित्तौड़ से सैकड़ों किलोमीटर दूर थीं। इससे साफ होता है कि वह सिर्फ अपनी रियासत की नहीं, बल्कि पूरे भारत की रक्षा के लिए लड़े।

राजवीर सिंह ने बताया-

सांगा ने कोटा के खतौली में युद्ध लड़ा, जो चित्तौड़ से 285 किलोमीटर दूर है। उन्होंने धौलपुर के बड़ी में युद्ध लड़ा, यह 470 किलोमीटर दूर था। उन्होंने गुजरात के इडर में 290 किलोमीटर दूर जाकर युद्ध लड़ा। सांगा ने मालवा के गागरोन में 250 किलोमीटर दूर और भरतपुर के बयाना जाकर 490 किलोमीटर दूर लड़ाई लड़ी।

500 किमी दूर जाकर राजा की बैंड बजाई

राजवीर सिंह ने बताया- इतना दूर जाकर लड़ाई लड़ने वाला योद्धा बाबर को युद्ध में साथ पाने के लिए भारत बुलाएगा, यह बात तर्क और समझ दोनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिस राजा ने 500 किलोमीटर दूर जाकर किसी अन्य राजा की बैंड बजा दी है, वह बाबर को इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बुलाएगा, यह बात हजम नहीं होती।

इब्राहिम लोदी की अपने क्षेत्र से 80 किलोमीटर तक नहीं चल रही है। इधर, चित्तौड़गढ़ के राजा ने 470 किलोमीटर जाकर इब्राहिम लोदी को हराकर आया और यह बात बोला जा रहा है कि इब्राहिम लोदी से तंग आकर राणा सांगा ने बाबर को भारत बुलाया है। कहां की बात कहां जोड़ दी। अगर बाबर को राणा सांगा ने बुलाया है तो बयाना का युद्ध क्यों लड़ा गया। सांगा और बाबर दोस्त थे तो आपस में क्यों भिड़े, इसका जवाब नहीं है किसी के पास।

चित्तौड़ सिर्फ एक शहर नहीं, विचारधारा

इतिहासकार ने कहा कि चित्तौड़ एक विचार है, जो हमें सिखाता है कि गिरकर भी कैसे खड़ा होना है और लड़ते रहना है। उन्होंने कहा कि चित्तौड़ मध्यकाल से पहले भी था और उसके बाद भी मजबूती से खड़ा रहा। इसकी विशेषता यही है कि यह कभी हार मानना नहीं जानता।

राजवीर सिंह चकलोई ने मेवाड़ की लोकतांत्रिक परंपरा को भी याद किया। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप को गद्दी पर बैठाने का फैसला जनता ने लिया था, यह सिर्फ राजवंशीय परंपरा का हिस्सा नहीं था। इस तरह मेवाड़ ने भारत को लोकतंत्र की पहली शिक्षा दी।

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