If you look at the goodness, Narayana can be found even in humans… | अच्छाई देखिए तो सही, नर…

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शिवाजी नगर के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा के सातवें दिवस पर बाल संत गोविंदराम महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के जीवन चरित्र की सभी महत्वपूर्ण गाथाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जिसका जैसा “चरित्र” होता है उसका वैसा ही “मित्र” होता है । “शुद्धता” होती है “विचारों” में, “आदमी” कब “पवित्र” होता है। फूलों में भी कीड़े पाए जाते हैं, पत्थरों में भी हीरे पाए जाते हैं, बुराई को छोड़कर अच्छाई देखिए तो सही, नर में भी नारायण पाए जाते हैं। वो वाणी धन्य है जो भगवान का गुण वर्णन करती है।
वही हाथ सच्चा हाथ है जो भगवान की सेवा करता है। वही सच्चा मन है जो जड़ चेतन सभी में परमात्मा का दर्शन करता है। वही कान सच्चे हैं जो भगवान की पवित्र कथाओं को श्रवण करते हैं। राजा परीक्षित शुकदेव महाराज से कहते हैं गुरुदेव वैसे तो भगवान के अनन्त नाम हैं, मुझे इनका एक नाम बहुत पसन्द आया। वह है दीनबंधु। महाराज भगवान का यह नाम क्यूं पड़ा? क्या भगवान कृष्ण ने किसी दीन हीन को भी अपना बन्धु बनाया था क्या? शुकदेव जी महाराज को सुदामा जी याद आ गए।