लाइफस्टाइल

AI से सवाल पर्यावरण पर बोझ! छोड़ रहा 50 गुना ज़्यादा CO₂, रिपोर्ट ने कर दिया सबको हैरान

Artificial Intelligence: आजकल हम जब भी किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल से कोई सवाल पूछते हैं तो वह केवल जवाब ही नहीं देता, बल्कि ऊर्जा भी खर्च करता है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) वातावरण में छोड़ता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ अब AI के पर्यावरणीय असर को लेकर चिंतित हैं.

जर्मनी के शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ AI मॉडल जो स्टेप-बाय-स्टेप तर्क (reasoning) करके जवाब देते हैं, साधारण और सीधे उत्तर देने वाले मॉडलों की तुलना में 50 गुना तक अधिक CO₂ उत्सर्जन करते हैं. हैरानी की बात यह है कि यह अतिरिक्त ऊर्जा और उत्सर्जन हर बार बेहतर जवाब भी नहीं देते.

AI जवाब देने के लिए टोकन का इस्तेमाल करता है. ये टोकन शब्दों या उनके अंशों को संख्यात्मक डेटा में बदलते हैं जिससे मॉडल उन्हें प्रोसेस कर सके. यही प्रोसेसिंग ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन का कारण बनती है. आम यूजर्स को इस छिपे हुए पर्यावरणीय खर्च का अंदाज़ा तक नहीं होता.

रिसर्च में क्या निकला सामने?

शोधकर्ताओं ने 14 बड़े भाषा मॉडल (LLMs) को परखा, जिनके पैरामीटर 7 से 72 बिलियन तक थे. इन्हें 1,000 सवालों के सेट पर टेस्ट किया गया. रीज़निंग मॉडल्स हर सवाल पर औसतन 543.5 टोकन खर्च करते हैं. वहीं, कंसीज़ मॉडल्स केवल 37.7 टोकन में जवाब देते हैं. स्पष्ट है कि जितने ज्यादा सोचने वाले टोकन बनेंगे, उतनी ही ऊर्जा खपत और उत्सर्जन बढ़ेगा. लेकिन ज़्यादा टोकन का मतलब हमेशा बेहतर जवाब नहीं होता.

नया AI संकट

Cogito नाम का 70 बिलियन पैरामीटर्स वाला एक reasoning मॉडल 84.9% सटीकता तक पहुंचा. लेकिन इसी प्रक्रिया में उसने समान आकार वाले concise मॉडलों की तुलना में तीन गुना ज्यादा CO₂ छोड़ा. यानि, ज्यादा सटीकता के लिए हमें भारी पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ रही है. शोध से यह भी पता चला कि जिन विषयों में जटिल तर्क की ज़रूरत होती है जैसे दर्शनशास्त्र या ऐब्स्ट्रैक्ट एल्जेब्रा, उनमें इतिहास जैसे सीधे विषयों की तुलना में 6 गुना ज्यादा उत्सर्जन हुआ.

पर्यावरण के अनुकूल AI इस्तेमाल कैसे करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि यूज़र्स समझदारी से AI का इस्तेमाल करके उत्सर्जन को काफी हद तक घटा सकते हैं. छोटे और सीधे जवाब मांगना, केवल ज़रूरी कामों में बड़े और पावरफुल मॉडल्स का इस्तेमाल करना और सही मॉडल चुनना ये सब बदलाव बड़ा असर डाल सकते हैं.

उदाहरण के तौर पर, DeepSeek R1 मॉडल (70B पैरामीटर) से 6 लाख सवाल पूछने पर उतना ही CO₂ उत्सर्जन होगा जितना लंदन से न्यूयॉर्क तक आने-जाने की फ्लाइट में होता है. जबकि Qwen 2.5 (72B पैरामीटर) लगभग 19 लाख सवाल उतने ही उत्सर्जन में हल कर सकता है.

यह भी पढ़ें:

Facebook से घर बैठे बन सकते हैं मालामाल! होगी मोटी कमाई, जानें पैसा कमाने का तरीका

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button