लाइफस्टाइल

Online या Offline! कहां से फोन खरीदने में है समझदारी, जानें किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

Online Vs Offline: आजकल नया स्मार्टफोन खरीदना सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भी तय करना जरूरी हो गया है कि फोन ऑनलाइन खरीदें या ऑफलाइन. एक तरफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारी डिस्काउंट और तेज़ डिलीवरी का वादा करते हैं तो वहीं ऑफलाइन स्टोर्स आपको फोन को हाथ में लेकर टेस्ट करने का मौका देते हैं. दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं और अगर सही तरीके से फैसला न लिया जाए तो बाद में पछताना पड़ सकता है. आइए जानते हैं किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

ऑनलाइन खरीदारी

ऑनलाइन शॉपिंग ने मोबाइल मार्केट का पूरा खेल बदल दिया है. फेस्टिव सेल, बैंक ऑफर और एक्सचेंज डील्स की मदद से फोन की कीमत हजारों रुपये तक कम हो जाती है. घर बैठे आप अलग-अलग मॉडलों की तुलना कर सकते हैं, रिव्यू पढ़ सकते हैं और कुछ ही मिनटों में ऑर्डर कर सकते हैं. डिलीवरी भी अक्सर 1-2 दिन में हो जाती है.

लेकिन यहां कुछ दिक्कतें भी हैं. बड़े ऑफर अक्सर कुछ खास कार्ड्स या पेमेंट ऐप्स तक सीमित होते हैं. सेल के दौरान स्टॉक बहुत जल्दी खत्म हो जाता है. साथ ही, फोन तब तक कैसा लगेगा इसका अंदाज़ा आपको तब तक नहीं लगता जब तक वो आपके हाथ में न आ जाए. अगर वज़न, लुक या बटन की प्लेसमेंट पसंद न आए तो आप आसानी से रिटर्न नहीं कर पाते. खराब यूनिट मिलने पर रिप्लेसमेंट तो मिल जाता है लेकिन सिर्फ मन बदलने पर रिफंड हमेशा आसान नहीं होता.

ऑफलाइन खरीदारी

रिटेल स्टोर में जाकर फोन खरीदने का अपना अलग ही फायदा है. यहां आप फोन को हाथ में लेकर डिस्प्ले की ब्राइटनेस, कैमरा क्वालिटी और हैंडलिंग को टेस्ट कर सकते हैं. कई बार सिर्फ फोन का रियल फील ही आपके डिसीजन को बदल देता है. साथ ही, दुकानदार अक्सर सेटअप में मदद, कवर या स्क्रीन गार्ड फ्री में दे देते हैं. कुछ मामलों में मोलभाव करने पर तुरंत डिस्काउंट भी मिल सकता है.

पुराने ग्राहकों के लिए लोकल शॉप्स कीमत में लचीलापन भी दिखाते हैं. हालांकि, ऑफलाइन प्राइसिंग आमतौर पर ऑनलाइन जितनी आकर्षक नहीं होती. इसके अलावा, रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी पूरी तरह दुकान पर निर्भर करती है और अक्सर उतनी ग्राहक-हितैषी नहीं होती जितनी ऑनलाइन.

एक्सक्लूसिव मॉडल्स की दिक्कत

आजकल कई कंपनियां अपने कुछ फोन सिर्फ ऑनलाइन या सिर्फ ऑफलाइन उपलब्ध कराती हैं. ऐसे में अगर आपका पसंदीदा मॉडल ऑनलाइन-एक्सक्लूसिव है तो आपको बिना टेस्ट किए खरीदना पड़ेगा. वहीं अगर फोन ऑफलाइन-ओनली है तो कीमत ज़्यादा हो सकती है और ऑनलाइन वाले बड़े डिस्काउंट्स नहीं मिलेंगे.

वारंटी और असलियत की जांच

सामान्य तौर पर फोन की वारंटी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह एक जैसी ही होती है, बशर्ते कि आप अथॉराइज्ड सेलर से खरीदें. लेकिन ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर कभी-कभी कुछ ग्रे-मार्केट सेलर्स भी मिल जाते हैं जो असली वारंटी के बिना बेहद कम कीमत पर फोन बेचते हैं. ऐसे फोन बाद में दिक्कत दे सकते हैं. ऑफलाइन खरीदारी में यह रिस्क कम होता है क्योंकि आप सीधे अधिकृत दुकानदार से डील करते हैं.

पेमेंट और EMI विकल्प

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आपको बैंक ऑफर्स, कैशबैक और नो-कॉस्ट EMI के ज्यादा विकल्प मिलते हैं. अगर आपके पास सही कार्ड है तो आप काफी पैसे बचा सकते हैं. दूसरी तरफ, ऑफलाइन स्टोर्स स्थानीय फाइनेंस कंपनियों से EMI ऑफर करते हैं जो उन ग्राहकों के लिए बेहतर है जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है.

आखिर बेहतर क्या है?

यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि आप किस चीज़ को ज्यादा महत्व देते हैं. अगर कम कीमत आपकी प्राथमिकता है तो ऑनलाइन खरीदारी आपके लिए बेहतर है. अगर आप फोन को हाथ में लेकर परखना चाहते हैं या खरीद के बाद पर्सनल सपोर्ट चाहते हैं तो ऑफलाइन शॉपिंग सही विकल्प है. वहीं, कुछ मामलों में मॉडल की एक्सक्लूसिविटी आपके लिए निर्णय लेना आसान बना देती है.

यह भी पढ़ें:

Vivo करेगी धमाका! 200MP कैमरा के साथ इस फोन में देगी धांसू फीचर्स, जानें कब होगा लॉन्च

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button