राष्ट्रीय

Supreme Court issued notice to the Center | सुप्रीम कोर्ट- रामसेतु को लेकर केंद्र को नोटिस…

नई दिल्ली5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चूने की उथली चट्टानों की चेन है। इसे भारत में रामसेतु और दुनियाभर में एडम्स ब्रिज (आदम का पुल) के नाम से जाना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुए केंद्र से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। स्वामी ने अपनी याचिका में 19 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का हवाला दिया है।

याचिका के मुताबिक, उस समय केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र से इस पर निर्णय लेने को कहा था और स्वामी को यह स्वतंत्रता दी थी कि यदि वे संतुष्ट न हों तो दोबारा कोर्ट आ सकते हैं। स्वामी की नई याचिका में कहा गया है,

19 जनवरी 2023 के आदेश के बाद उन्होंने 27 जनवरी 2023 को केंद्र को सभी दस्तावेजों के साथ एक प्रतिनिधित्व सौंपा था। इसके बाद 13 मई 2025 को उन्होंने एक और नया प्रतिनिधित्व भेजा, लेकिन अब तक न तो उन्हें और न ही सुप्रीम कोर्ट को कोई जवाब मिला है।

याचिका में मांग की गई है कि संस्कृति मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2023 के आदेश के अनुसार स्वामी के प्रतिनिधित्व पर जल्द से जल्द और समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।

स्वामी बोले- रामसेतु आस्था का प्रतीक है स्वामी की याचिका में कहा गया है कि रामसेतु एक पुरातात्विक स्थल होने के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र भी है। याचिका में कहा गया है कि वैज्ञानिक और पुरातात्विक अध्ययन इस बात के प्रमाण हैं कि यह मानव निर्मित संरचना है, जिसे श्रद्धालु तीर्थ स्थल मानते हैं।

जानिए क्या है रामसेतु

  • भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चूने की उथली चट्टानों की चेन है। इसे भारत में रामसेतु और दुनियाभर में एडम्स ब्रिज (आदम का पुल) के नाम से जाना जाता है।
  • इस पुल की लंबाई लगभग 30 मील (48 किमी) है। यह पुल मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरू मध्य को एक दूसरे से अलग करता है। इस इलाके में समुद्र बेहद उथला है। जिससे यहां बड़ी नावें और जहाज चलाने में खासी दिक्कत आती है।
  • कहा जाता है कि 15 शताब्दी तक इस ढांचे पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन तूफानों ने यहां समुद्र को कुछ गहरा कर दिया जिसके बाद यह पुल समुद्र में डूब गया।
  • 1993 में नासा ने इस रामसेतु की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं जिसमें इसे मानव निर्मित पुल बताया गया था।

———————–

खबरें और भी हैं…

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button