निलंबन अवधि बढ़ाने के आदेश के खिलाफ डीआरटी अधिकारी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त, 2025) को चंडीगढ़ स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) के एक पीठासीन अधिकारी की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपनी निलंबन अवधि बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के जुलाई के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं.
हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें चंडीगढ़ स्थित डीआरटी-दो के पीठासीन अधिकारी के पद से उनके निलंबन की अवधि बढ़ाने के दूसरे आदेश के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि डीआरटी में इस अधिकारी द्वारा मामलों के निपटान की दर सबसे अधिक है.
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘यदि आप वकीलों को बहस करने की अनुमति नहीं देते हैं, तो आप हर दिन सभी मामलों का फैसला कर सकते हैं.’ रिकॉर्ड में यह बात आई कि याचिकाकर्ता को 20 फरवरी, 2022 को डीआरटी-दो, चंडीगढ़ का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया था, लेकिन डीआरटी बार एसोसिएशन से उनके खिलाफ कई शिकायतें मिलीं.
बाद में, शिकायतों को विचारार्थ ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (DRAT), दिल्ली के प्रमुख को भेज दिया गया. जब शिकायतें लंबित थीं, तब डीआरटी बार एसोसिएशन के सदस्यों ने विरोध स्वरूप पीठासीन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने से इनकार कर दिया.
यह भी आरोप लगाया गया कि स्थगन देने के बजाय, अधिकारी द्वारा कई मामलों को एकतरफा कार्यवाही कर खारिज कर दिया गया. बाद में, डीआरटी बार एसोसिएशन ने अधिकारी द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की. अक्टूबर 2022 में, हाईकोर्ट ने हड़ताल पर जाने के लिए वकीलों की निंदा करते हुए, पीठासीन अधिकारी को कोई भी प्रतिकूल आदेश पारित करने से रोक दिया.
इसके बाद अधिकारी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने दिसंबर 2022 में आदेश को संशोधित किया और उन्हें अपने समक्ष आने वाले मामलों की आगे की सुनवाई और गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति दी.