क्या है दारुमा गुड़िया? जापान यात्रा के दौरान पीएम मोदी को मिला तोहफा, जानें इसका भारत से…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 और 30 अगस्त को 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं. जापान में पीएम मोदी को तोहफे के रुप में एक पारंपरिक दारुमा गुड़िया भेंट की गई.
दरअसल यह जापानी दारुमा गुड़िया गोल, लाल, खोखली आकृति जैसी दिखती है, जिसका एक चेहरा तो होता है, लेकिन उसके हाथ या पैर नहीं होते हैं. जापान की ये गुड़िया बोधि धर्म (दारुमा) का प्रतीक है, जो पांचवी शताब्दी में भिक्षु थे और उन्होंने बौध्द धर्म की स्थापना की थी.
क्या है जापान में दारुमा गुड़िया की मान्यता?
मान्यताओं के अनुसार, दारुमा ने इतने समय तक ध्यान किया कि उनके हाथ और पैर कट गए. ऐसा भी माना जाता है कि यह सौभाग्य का प्रतीक है. इस खिलौने को ऐसे डिजाइन किया गया है कि अगर इसे पलट दिया जाए तो यह खुद ही सीधा खड़ा हो जाता है.
𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐚𝐧𝐝 𝐉𝐚𝐩𝐚𝐧: 𝐀 𝐛𝐨𝐧𝐝 𝐫𝐨𝐨𝐭𝐞𝐝 𝐢𝐧 𝐭𝐫𝐚𝐝𝐢𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐚𝐧𝐝 𝐜𝐮𝐥𝐭𝐮𝐫𝐞!
In a beautiful celebration of civilizational ties, PM @narendramodi was presented with a vibrant and symbolic Daruma Doll, a cherished good luck charm in Japanese… pic.twitter.com/MLJF7y6Sk3
— BJP (@BJP4India) August 29, 2025
जापान के घरों, दुकानों और मंदिरों में दारुमा को सौभाग्य और लक्ष्यों की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि जब कोई मान्यता मांगता है तो वह दारुमा गुड़िया खरीदता है. मान्यता मांगते समय वह अपनी एक आंख पर रंग लगाता है और जब कामना पूरी हो जाती है तो दूसरी आंख पर भी रंग लगा लेता है.
लाल रंग के दारुमा का क्या है महत्व?
जापान में ज्यादातर दारुमा गुड़िया लाल रंग में उपलब्ध होता है, क्योंकि कहा जाता है कि भिक्षु बोधिधर्म को अक्सर लाल रंग के कपड़े पहने दिखाया गया है. साथ ही पूर्वी एशियाई देशों में लाल रंग को सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है.
जापानी कथाओं के अनुसार, दारुमा गुड़िया को ‘नानाकोरोबी याओकी’ कहावत से भी लोग जोड़ते हैं, जिसका मतलब है, ‘सात बार नीचे, आठ बार ऊपर’. इस कहावत के अनुसार, आप चाहे कितनी बार भी असफल हों, आप बार-बार उठते हैं.
भारत से है क्या कनेक्शन?
माना जाता है कि मदुरई के बोधिसेना नाम के बौद्ध भिक्षु से दारुमा गुड़िया की प्रेरणा ली गई है. बोधिसेना 5वीं शताब्दी के दौरान चीन और वहां से जापान गए थे. भारत से गए बौद्धभिक्षु बोधिसेना को जापान और चीन में बौद्ध धर्म के संस्थापक के तौर पर देखा जाता है.
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