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Digambar Jain community is celebrating Paryushan festival | दिगंबर जैन समाज मना रहा पर्यूषण…

दिगंबर जैन समाज में इन दिनों पर्यूषण पर्व बड़े ही श्रद्धा और खुशी के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व 28 अगस्त से शुरू हुआ है और 6 सितम्बर तक चलेगा। समाज के लोग इस समय पूजा-पाठ, साधना और अच्छे कामों में लगे हुए हैं। पर्यूषण पर्व जैन धर्म का सबसे पवित्र औ

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इस पर्व के दौरान दस दिनों तक दस धर्मों की पूजा होती है। ये धर्म क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य हैं। हर दिन एक धर्म पर विशेष ध्यान दिया जाता है। लोग सुबह जल्दी उठकर मंदिर जाते हैं, अभिषेक करते हैं और शांतिधारा करते हैं। इसके बाद पूजा और ध्यान करते हैं। इस तरह लोग अपने जीवन में अच्छे विचार और अच्छे आचरण लाने का प्रयास करते हैं।

ढूंचा बाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं और भक्ति भाव से पूजा करते हैं। वहां रोज अभिषेक और शांतिधारा की जाती है। साथ ही दस लक्षण धर्मों की पूजा भी नियम से की जाती है। सभी भक्तजन बहुत ही श्रद्धा और नियम से इन दिनों पूजा में शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा शहर के दूसरे जैन मंदिरों में भी पर्यूषण पर्व मनाया जा रहा है, जैसे किला क्षेत्र का कीर्ति स्तम्भ जैन मंदिर, शास्त्री नगर का सुपार्श्वनाथ मंदिर, मधुवन का आदिनाथ मंदिर और कुम्भानगर का चेत्यालय मनाया जा रहा हैं। हर जगह समाज के लोग बड़ी श्रद्धा और उत्साह से इस पर्व में भाग ले रहे हैं।

ढूंचा बाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं और भक्ति भाव से पूजा करते हैं।

समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश गदिया ने बताया कि समाज के हर उम्र और हर वर्ग के लोग इस पर्व में भाग ले रहे हैं। बच्चे, बड़े, महिलाएं और बुजुर्ग सभी पूजा-पाठ और सेवा में लगे हुए हैं। बच्चों को धर्म की जानकारी देने के लिए उनके लिए विशेष कार्यक्रम भी रखे जा रहे हैं। सभी लोग इस पर्व को बहुत ही अनुशासन और भक्ति भाव से मना रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पर्यूषण पर्व हमें संयम, साधना और आत्मशुद्धि का रास्ता दिखाता है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, गलत कामों से बचते हैं और अपने मन को शांत और पवित्र करने की कोशिश करते हैं। पर्व के आखिरी दिन “क्षमावाणी” मनाई जाती है। इस दिन लोग एक-दूसरे से माफी मांगते हैं और दिल से सबको माफ कर देते हैं।

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