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US Tariff On India: ‘चूहे का हाथी को मुक्का मारना’, ट्रंप के टैरिफ पर US के अर्थशास्त्री का…

अमेरिकी मार्क्सवादी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि अमेरिका भारत के खिलाफ दुनिया का सबसे सख्त देश बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन असल में यह कदम खुद के लिए विनाशकारी है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत अब दुनिया का सबसे बड़े देशों में शामिल है. अमेरिका का भारत को यह बताना कि उसे क्या करना है, ऐसा है जैसे चूहे का हाथी को मुक्का मारना.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लागू कर दिया है. यह शुल्क पहले से मौजूद दरों से दोगुना है. भारत रूस से तेल खरीदता है. इस वजह से अमेरिका ने 25 फीसदी का टैरिफ अलग से लगाया है, जिसे वॉशिंगटन यूक्रेन युद्ध को रोकने की रणनीति के खिलाफ मानता है. हालांकि, भारत ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे गलत और बिना सोच-विचार के लिया गया फैसला करार दिया है.

ब्रिक्स को मिला अप्रत्यक्ष फायदा
रिचर्ड वोल्फ ने समझाया कि अमेरिका के इस कदम से भारत अपनी रणनीति बदल लेगा. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका भारत के लिए अपने रास्ते बंद करता है तो भारत अपनी चीजों को बेचने के लिए दूसरी जगह ढूंढ लेगा. भारत अब अपने समानों के निर्यात को ब्रिक्स देशों में शिफ्ट कर सकता है, जैसे रूस, चीन, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और हाल ही में जुड़े नए सदस्य (मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, यूएई). इस बीच ब्रिक्स का लक्ष्य पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व को चुनौती देना और डॉलर के विकल्प खोजना है.

जी 7 बनाम ब्रिक्स
वोल्फ ने पॉडकास्ट में कहा कि ब्रिक्स देशों की विश्व उत्पादन हिस्सेदारी 35 फीसदी है. दूसरी तरफ जी7 की हिस्सेदारी घटकर 28 फीसदी रह गई है. उनके अनुसार, ट्रंप के टैरिफ और दबाव की नीति ब्रिक्स को और मजबूत और एकीकृत आर्थिक ब्लॉक बनने में मदद कर रही है.

ब्रिक्स को खारिज करने की कोशिश
ट्रंप कई बार ब्रिक्स को छोटा समूह कहकर खारिज कर चुके हैं. फरवरी में उन्होंने कहा था कि ब्रिक्स खत्म हो चुका है. उन्होंने यह भी धमकी दी थी कि अगर ब्रिक्स अपनी करेंसी बनाता है तो अमेरिका 100% टैरिफ लगाएगा. वोल्फ ने कहा कि सोवियत काल से ही भारत का अमेरिका के साथ पुराना और जटिल रिश्ता रहा है. उन्होंने चेतावनी दी अमेरिका यह मान रहा है कि भारत किसी और छोटे देश जैसा है, लेकिन वह बिल्कुल अलग प्रतिद्वंद्वी है. यह कदम न केवल भारत को अमेरिका से दूर कर सकता है, बल्कि एशिया में नया आर्थिक और राजनीतिक संतुलन भी बना सकता है.

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