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Children forced to study in the open in a dilapidated school | जर्जर स्कूल में खुले में पढ़ने…

प्राथमिक स्कूल के सभी चार कमरे जर्जर हैं और कमरों के जर्जर होने के चलते बच्चे स्कूल के बाहर खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

डूंगरपुर शहर से सटे बोरी गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल केतन फला इन दुर्दशा का शिकार है। प्राथमिक स्कूल के सभी चार कमरे जर्जर हैं और कमरों के जर्जर होने के चलते बच्चे स्कूल के बाहर खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

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डूंगरपुर ब्लॉक का शहर से सटा राजकीय प्राथमिक स्कूल केतन फला बोरी में एक से 5वीं तक की कक्षा संचालित होती है। स्कूल में 61 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है। वहीं स्कूल में 4 कमरे बने हुए हैं, लेकिन लंबे समय से स्कूल के सभी कमरे जर्जर अवस्था में हैं। जर्जर 4 कमरों में से तीन कमरों को पूरी तरह से बंद कर रखा है। वहीं एक कमरे के हालत थोड़े ठीक होने से उसमें ऑफिस का सामान रखा हुआ है। इसके साथ ही स्कूल भवन के बरामदे भी जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में बरामदों में बच्चों को नहीं पढ़ाया जा सकता है। वहीं कमरे नहीं होने से बच्चों को खुले में बैठकर पढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल के स्टाफ ने बताया कि स्कूल के जर्जर भवनों के बारे में कई बार अधिकारियों को जानकारी भेजी गई है, लेकिन आश्वासन के अलावा विभाग की ओर से कुछ नही मिला है। बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठाकर पढ़ाना मजबूरी बनी हुई है। स्टाफ ने बताया कि ज्यादा परेशानी बारिश के मौसम में आती है। बारिश होने से जर्जर कमरों में बैठाकर पढ़ाना किसी खतरे से खाली नहीं है। वहीं बारिश की वजह से खुले आसमान के नीचे पढ़ाना भी बड़ी समस्या है। ऐसे में बारिश होने पर बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है।

कई स्कूलों में यही हाल राजकीय प्राथमिक स्कूल केतन फला बोरी की तरह ही कई स्कूलों में यही हालत है। जहां बच्चों और स्टाफ को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अधिकतर स्कूल के हालात ऐसे ही हैं, जहां भवन और कमरे जर्जर हो चुके हैं और बच्चों को खुले आसमान या जर्जर कमरों में ही पढ़ाया जा रहा है।

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