Discussion on environment in Manipal University Jaipur | मणिपाल विवि जयपुर में पर्यावरण पर…

सेमिनार का विषय था “ऊर्जा, स्थिरता और जलवायु परिवर्तन: भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं दृष्टिकोण”।
मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर में आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के सहयोग से एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय था “ऊर्जा, स्थिरता और जलवायु परिवर्तन: भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं दृष्टिकोण”।
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अयोध्या स्थित हनुमंत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि वन के बिना जीवन अधूरा है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार हर पौधे में औषधीय गुण होते हैं।
विश्वविद्यालय की प्रोवोस्ट डॉ. नीतू भटनागर ने बताया कि संस्थान पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण संयोजक गोपाल आर्य ने प्रतिभागियों को पर्यावरण रक्षा का संकल्प दिलवाया।
राजस्थान के उच्च शिक्षा आयुक्त ओ.पी. बैरवा ने पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संजय स्वामी ने प्लास्टिक के नुकसान के बारे में बताया।
राजस्थान के उच्च शिक्षा आयुक्त ओ.पी. बैरवा ने पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संजय स्वामी ने प्लास्टिक के नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का आयोजन मीडिया, कम्युनिकेशन एंड फाइन आर्ट्स विभाग ने किया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली ने नॉलेज पार्टनर के रूप में सहयोग दिया।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, राजस्थान के सह-संयोजक नितिन के. जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सामूहिक उत्तरदायित्व है।
तकनीकी सत्र में देशभर से आए शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। समापन समारोह में एमबीएम विवि, जोधपुर के प्रो. मिलिंद कुमार शर्मा ने भारतीय ज्ञान प्रणाली में रिसाइकिल और रीयूज की परंपराओं पर चर्चा की। इनोवेटिव गवर्नेंस रिफॉर्म फेडरेशन के डायरेक्टर डॉ. विजय व्यास ने जलवायु परिवर्तन के कारणों और उसके वैश्विक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस संगोष्ठी का संयोजन डॉ. प्रभात दीक्षित और डॉ. विनोद यादव ने किया, जबकि संचालन डॉ. प्रशास्ति जैन और डॉ. गोविंद कुमार ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण और शोध छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।