Income Tax Department’s mistake was rectified after 29 months on High Court intervention |…

भीलवाड़ा निवासी स्वाति पामेचा को आयकर विभाग के एक गलत नोटिस ने पिछले 29 महीनों से परेशान कर रखा था, लेकिन यह परेशानी खत्म हुई राजस्थान हाईकोर्ट में नोटिस खारिज होने के साथ। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस संगीता शर्मा की डबल बेंच ने 28 अगस्त को सुनवाई कर
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मामला वित्तीय वर्ष 2018-19 से संबंधित है, जब आयकर विभाग ने स्वाति पामेचा के नाम से कथित तौर पर 88,56,789 रुपए का लेनदेन दिखाया था। इसमें से जिग्ना शाह की दो प्रोपराइटरी फर्मों, गणपति टेक्सटाइल से 84,56,789 रुपए और राधिका एंड ब्रदर्स के माध्यम से 4 लाख रुपए के फर्जी लेनदेन (एकोमोडेशन एंट्री) के रूप में प्राप्त किए।
साक्ष्यों से दिया झूठे आरोप का जवाब, फिर भी दुबारा नोटिस
अधिवक्ता रजत अरोड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि स्वाति पामेचा को 4 मार्च 2023 को आयकर अधिनियम की धारा 148-A के तहत नोटिस मिला था। इसमें कहा गया था कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में उसकी आय का आकलन नहीं हुआ है। नोटिस के साथ भेजी गई जानकारी के अनुसार, डिप्टी डायरेक्टर इनकम टैक्स अहमदाबाद द्वारा 19 फरवरी 2021 को भेजी गई सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। विभाग का आरोप था कि ये दोनों फर्में संजय टिबरीवाल द्वारा चलाई जा रही थी, जो डमी लेनदेन के ट्रांजेक्शन करने का काम करती थीं।
स्वाति ने 13 मार्च 2023 को ही अपने उत्तर देते हुए स्पष्ट रूप से बताया था कि उसका इन फर्मों से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और न ही वह इन्हें जानती है। यहां तक कि उसने अपने तीनों बैंक खातों के स्टेटमेंट भी आयकर अधिकारी को दिए। उनमें भी विभाग द्वारा कथित रूप से बताया जा रहा ऐसा कोई लेनदेन नहीं मिला, जो विभाग के आरोप को सही साबित करे। साथ ही यह भी बताया गया कि वह 2018 से किसी काम में संलग्न नहीं है।
पेन कार्ड दुरुपयोग पर दर्ज कराई FIR
मामले की गंभीरता को समझते हुए स्वाति पामेचा ने 17 जून 2023 को भीलवाड़ा के कोतवाली थाना में FIR दर्ज कराई। इसमें उसने गणपति टेक्सटाइल और राधिका एंड ब्रदर्स के खिलाफ अपने पेन नंबर के गलत उपयोग का आरोप लगाया। उसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया कि उसका इन फर्मों से कोई संबंध नहीं है और किसी ने उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग करके फर्जी लेनदेन किया है।
पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग अहमदाबाद से रिकॉर्ड मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्थानीय आयकर विभाग ने भी पेन कार्ड से संबंधित रिकॉर्ड देने से इनकार कर दिया, क्योंकि मामला हाईकोर्ट में लंबित था।
विभाग ने गलती स्वीकारने में लगाए 29 महीने
इसी बीच, 30 मार्च 2023 को आयकर अधिकारी ने धारा 148-A(d) के तहत आदेश पारित करते हुए स्वाति के खिलाफ रिअसेसमेंट की कार्रवाई शुरू कर दी थी। लेकिन बाद में विभाग को अपनी गलती का एहसास हुआ] जब पता चला कि यह कार्रवाई तो ‘शुभम पामेचा’ के खिलाफ होनी चाहिए थी, न कि स्वाति पामेचा के खिलाफ।
आयकर विभाग ने अपने अतिरिक्त हलफनामे में स्वीकार किया कि तत्कालीन JAO (ITO वार्ड-1, भीलवाड़ा) को जानकारी में ‘पामेचा शुभम’ का नाम मिला था, लेकिन पेन नंबर ANSPP3635K स्वाति पामेचा के नाम से था। इस भ्रम को दूर करने के लिए 1 मार्च 2023 को DDIT (Inv.), यूनिट 1(2), अहमदाबाद से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
हाईकोर्ट का फैसला: दोनों नोटिस रद्द
हाईकोर्ट ने आयकर विभाग के इस तर्क को स्वीकार किया कि नोटिस गलत व्यक्ति को भेजा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह स्पष्ट हो चुका है कि विवादित नोटिस गलत तरीके से स्वाति पामेचा को भेजा गया था, इसलिए 4 मार्च 2023 का नोटिस और 30 मार्च 2023 के आदेश को निरस्त किया जाता है।
कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस भ्रम की स्थिति में भेजा गया था और इसका कोई वैधानिक आधार नहीं था। डिवीजन बेंच ने रिट पेटिशन को मंजूर करते हुए सभी कार्यवाही को रद्द कर दिया। स्टे एप्लीकेशन भी इसी के साथ निस्तारित कर दी गई।