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अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाने से हरियाणा में स्टील-फार्मा इंडस्ट्री पर असर दिख रहा है। फाइल फोटो

भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर 27 अगस्त से 50% टैरिफ लागू हो गया है। इस नई टैरिफ नीति का असर हरियाणा में भी देखने को मिल रहा है। क्योंकि देश से जो सामान अमेरिका में निर्यात होता है, उसमें हरियाणा का बहुत बड़ा योगदान है। इसमें टेक्सटाइल, रे

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दैनिक भास्कर एप की टीम ने इन सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट से जानने की कोशिश की तो सबसे ज्यादा असर ऑटो और गारमेंट्स पर पड़ने की बात कही गई। बताया कि अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स के लिए सबसे बड़ा बाजार है। खासकर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और रेवाड़ी के बावल और धारूहेड़ा से बड़ी संख्या में सामान जाता है। अभी तक अमेरिका कारों, छोटे ट्रकों और उनके पार्ट्स पर 25% शुल्क लग रहा था, जबकि कॉमर्शियल वाहनों के पुर्जों पर यह शुल्क 10% था।

मानेसर इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रेजिडेंट पवन यादव की माने तो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ऑटो पार्ट्स के कुल निर्यात का लगभग 32% हिस्सा अमेरिका को गया। अब टैरिफ बढ़ोतरी से 7 बिलियन डॉलर (लगभग ₹61,000 करोड़) के सालाना ऑटो पार्ट्स निर्यात में से ₹30,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित हो सकता है।

भारत से अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट का 10 फीसदी गुरुग्राम से होता है। ऐसे ही हिसार के स्टील और एविएशन, करनाल की बासमती राइस, पानीपत के कपड़ा उद्योग, अंबाला से साइंटिफिक इक्विपमेंट्स और रोहतक की नट-बोल्ट इंडस्ट्री पर क्या रहेगा नए टैरिफ का असर, पढ़िए पूरी रिपोर्ट….

गुरुग्राम: 25 हजार करोड़ की गारमेंट्स, फार्मा और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री प्रभावित मानेसर इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रेजिडेंट पवन यादव ने बताया कि अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण गुरुग्राम की इंडस्ट्री पर 25 हजार करोड़ का असर पड़ेगा। गारमेंट एक्सपोर्ट की 400 से अधिक कंपनियां हैं, जिनमें से 150 से अधिक कंपनियां अमेरिका पर निर्भर हैं। गुरुग्राम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व प्रेजिडेंट जेएन मंगला ने बताया कि 10 दिन से ऑर्डर नहीं हैं, जो ऑर्डर थे, वे कैंसिल हो चुके हैं और प्रोडक्शन फिलहाल बंद है। विकल्प नहीं मिला तो इन कंपनियों में कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है। इसके अलावा हाउस होल्ड प्रोडक्शन करने वाली कंपनियों पर टैरिफ का असर दिख रहा है।

हिसार: 10.53 करोड़ रुपए की डील अटक सकती है हिसार में स्टील और एविएशन सेक्टर प्रभावित होगा। पिछले साल हरियाणा सरकार और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत अमेरिकी व्यापार एवं विकास एजेंसी (USTDA) को हिसार एयरपोर्ट और इंटीग्रेटेड एविएशन हब (IAH) को विकसित करने में तकनीकी और आर्थिक मदद करनी थी। इसमें अमेरिका की ओर से 10.53 करोड़ रुपए (करीब 1.25 मिलियन डॉलर) का निवेश किया जाना था। मगर, मौजूदा हालातों को देखते हुए आशंका है कि अमेरिकी एजेंसी इस परियोजना से पीछे हट सकती है या इसमें अड़चनें आ सकती हैं।

पानीपत: 30 प्रतिशत ऑर्डर अटक गए हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एचसीसीआई) के पानीपत चैप्टर के चेयरमैन विनोद धमीजा के मुताबिक नए टैरिफ से कपड़ा उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा। पानीपत से अमेरिका में 12 हजार करोड़ का निर्यात होता है। अकेले क्रिसमस सीजन पर 1,500 करोड़ का निर्यात होता है। अब लगभग 30 प्रतिशत ऑर्डर अटक गए हैं। अमेरिका में सबसे अधिक कुशन कवर, बाथ मैट, तौलिया, सोफे कवर, परदे और दरियां जाती हैं। अब अमेरिका से ऑर्डर मिलने की संभावना न के बराबर है। अमेरिकन इन ऑर्डर को बांग्लादेश, पाकिस्तान और वियतनाम में शिफ्ट कर सकते हैं।

करनाल : एक से डेढ़ प्रतिशत असर बासमती एक्सपोर्ट पर ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सतीश गोयल का कहना है कि भारत से पूरे वर्ल्ड मे 60 लाख टन बासमती राइस एक्सपोर्ट होता है। इसमें से साढ़े 4 प्रतिशत राइस अमेरिका को जाता है। ऐसे मे एक से डेढ़ प्रतिशत असर एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है और यह कोई बड़ा असर नहीं है। हम इस राइस को किसी और कंट्री मे भी बेच सकते हैं, जिसको लेकर विकल्प तलाशें जा रहे है। वहीं, सरकार से भी एसोसिएशन की बातचीत चल रही है और हमें हमारे देश के प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है वे समाधान निकालेंगे और हम पीएम के फैसले के साथ है। वाइस प्रेजीडेंट पंकज ने कहा-

अमेरिका में करीब एक लाख टन यानि एक हजार करोड़ का माल जाता था। शुरू में तो थोड़ा बहुत इम्पैक्ट पड़ेगा, लेकिन खाने पीने की चीजों पर हम बहुत बड़ा इम्पैक्ट नहीं देख रहे हैं। नुकसान तो है, लेकिन 50 प्रतिशत एक्सपोर्ट रहने की उम्मीद है।

रोहतक : नट-बोल्ट इंडस्ट्री पर 4000 करोड़ रुपए का सीधा असर एमएसएमई एसोसिएशन के सदस्य विजय हरजाई ने बताया कि रोहतक की नट-बोल्ट इंडस्ट्री पर 4000 करोड़ रुपए का सीधा प्रभाव का बड़ा खतरा है। अगर टैरिफ बढ़ा तो इनकी कीमतें काफी अधिक हो जाएंगी, जिससे ग्राहक अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं। चंद्रयान और एयर डिफेंस सिस्टम में उपयोग होने वाले नट-बोल्ट बनाने वाली प्रमुख कंपनी LPS बोशार्ड ही अकेले अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए 200 करोड़ रुपए का नट-बोल्ट निर्यात करती है। अंबाला : 500-600 करोड़ का साइंटिफिक इक्विपमेंट्स एक्सपोर्ट प्रभावित अंबाला के एक्सपोर्टर डॉ. अनिल जैन ने बताया कि अभी फिलहाल 500-600 करोड़ का एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है। टैरिफ के कारण लगभग 25 फीसदी ऑर्डर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि साइंटिफिक इक्विपमेंट्स को अभी अमेरिका किस कैटेगरी में रखता है, उसके बाद इसका और असर भी दिखाई देगा। अंबाला से कुल मिलाकर करीब चार मिलियन डालर का साइंस उपकरणों का एक्सपोर्ट किया जाता है, इससे कई ऑर्डर रद्द हो गए हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात करता FIEO का प्रतिनिधिमंडल।

FIEO प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की, 2 डिमांड रखीं…

वृद्धि के कारण आने वाली चुनौतियों पर चर्चा : FIEO अध्यक्ष एससी रल्हन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और अमेरिकी टैरिफ में की गई वृद्धि के कारण भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। FIEO के उपाध्यक्ष रविकांत कपूर, हानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ अजय सहाय, फरीदा समूह के निदेशक इसरार अहमद और EEPC के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने बाजार पहुंच, प्रतिस्पर्धा और रोजगार पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव पर जोर दिया और निर्यातक समुदाय की सहायता के लिए त्वरित नीतिगत उपाय करने का आग्रह किया।

वित्त मंत्री ने दिया आश्वासन : रल्हन ने बताया कि वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार निर्यातकों के साथ मजबूती से खड़ी है। कहा कि व्यापारिक हितों की रक्षा और श्रमिकों की आजीविका की रक्षा के लिए व्यापक समर्थन देने का वचन देती है। मंत्री का आश्वासन निर्यातकों के लिए आत्मविश्वास का एक बड़ा स्रोत है। FIEO बाजारों में विविधता लाने और भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।

भारत और अमेरिका के बीच कितना व्यापार, इन्फोग्राफिक्स में जानिए…

इनपुट : हिसार से चेतन सिंह, करनाल से रिंकू नरवाल, रोहतक से दीपक शर्मा, अंबाला से राम सारस्वत।

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