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‘क्या अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर बनाना चाहते हैं दीवार’, सुप्रीम को…

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त, 2025) को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह अवैध प्रवासियों को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहती है. शीर्ष अदालत ने कहा कि बांग्ला और पंजाबी भाषी भारतीयों की पड़ोसी देशों के साथ साझा सांस्कृतिक और भाषाई विरासत है और वे एक ही भाषा बोलते हैं लेकिन सीमाओं की ओर से विभाजित हैं.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की बेंच ने केंद्र से कहा कि वह अवैध प्रवासियों को खासकर बांग्लादेश में वापस भेजने में सरकारों की ओर से अपनाई गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के बारे में उसे अवगत कराएं. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुजरात सरकार को भी पक्षकार बनाया है.

पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड ने दाखिल की याचिका, केंद्र ने जताई आपत्ति

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड की ओर से दायर याचिका पर आपत्ति जताई. याचिका में बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया है और कहा कि कोई भी पीड़ित पक्ष अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ.

उन्होंने कहा, ‘इस अदालत को इन संगठनों और संघों की ओर से दायर याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए, जिन्हें कुछ राज्य सरकारों का समर्थन प्राप्त हो सकता है. अदालत के समक्ष कोई पीड़ित पक्ष नहीं है. हम जानते हैं कि कुछ राज्य सरकारें अवैध प्रवासियों के बल पर कैसे फूलती-फलती हैं. डेमोग्राफिक परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा बन गया है.’

इस पर बेंच ने मेहता से कहा कि पीड़ित लोग संसाधनों के अभाव में शायद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने में असमर्थ हैं. मेहता ने याचिकाकर्ता बोर्ड और अन्य गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण का जिक्र करते हुए कहा कि जन हितैषी व्यक्तियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने में उनकी मदद करनी चाहिए और साथ ही अमेरिका में लोगों की मदद करनी चाहिए, जहां अवैध आव्रजन का मुद्दा बड़ा है.

क्या अमेरिका की तरह सीमा पर बनाना चाहते हैं दीवार- सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति बागची ने बाद में मेहता से पूछा, ‘क्या आप अवैध शरणार्थियों को भारत में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहते हैं?’ इस पर मेहता ने कहा, ‘बिल्कुल नहीं, लेकिन कोई व्यक्तिगत शिकायतकर्ता नहीं है. भारत सरकार याचिका में लगाए गए अस्पष्ट आरोपों का जवाब कैसे दे सकती है. कोई व्यक्ति आकर कहे कि मुझे बाहर निकाला जा रहा है. हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि शरणार्थी हमारे संसाधनों पर कब्जा न कर लें. हम ऐसी ही किसी खबर पर भरोसा नहीं कर सकते. ऐसे एजेंट हैं जो देश में अवैध प्रवेश में मदद करते हैं.’’

न्यायमूर्ति बागची ने तब मेहता से कहा, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्र की अखंडता और जैसा कि आपने कहा हमारे संसाधनों के संरक्षण के प्रश्न हैं. साथ ही, यह याद रखने की जरूरत है कि हमारी साझा विरासत है और (पश्चिम) बंगाल और पंजाब में भाषा एक ही है और सीमाएं देश को विभाजित करती हैं. हम चाहते हैं कि केंद्र इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे.’

बांग्ला भाषी लोगों को जबरदस्ती बांग्लादेश भेजा जा रहा है- प्रशांत भूषण

वहीं, प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि बांग्ला भाषी लोगों को उठाकर जबरदस्ती बांग्लादेश में भेजा जा रहा है. इससे पहले सुनवाई के दौरान भूषण ने पीठ को बताया कि 14 अगस्त को न्यायालय की ओर से 9 राज्यों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किए गए.

उन्होंने बांग्लादेश में हिरासत में ली गई एक गर्भवती महिला के परिवार के सदस्यों की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की ओर इशारा किया और कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले को स्थगित कर दिया है, क्योंकि मामला यहां लंबित है.

बांग्लादेशियों के हिरासत के संबंध में याचिका पर नहीं देंगे कोई अंतरिम आदेश- SC

पीठ ने हाई कोर्ट से मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया और स्पष्ट किया कि इन कार्यवाहियों का लंबित रहना हाई कोर्ट की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला लेने में बाधा नहीं बनेगा. सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को कथित बांग्लादेशी नागरिकों की हिरासत के संबंध में जनहित याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. जनहित याचिका में कहा गया है, ‘यह याचिका प्रवासी श्रमिकों की ऐसी हिरासत की वैधता को चुनौती देती है, विशेष रूप से गृह मंत्रालय के दो मई, 2025 के पत्र के आलोक में, जो संदिग्ध अवैध प्रवासियों के अंतर-राज्यीय सत्यापन और हिरासत को अधिकृत करता है.’

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