Shamnapur Railway Bridge: रेलवे लाइन हो गई थी खोखली… बाढ़ में बह गई मिट्टी और कंकड़-पत्थर,…

तेलंगाना के काना रेड्डी के बाद अब मेडक जिले में बारिश ने कहर बरपाया हुआ है. भारी बारिश के कारण शम्नापुर रेलवे ब्रिज के नीचे आई प्रचंड बाढ़ ने रेलवे ट्रैक को क्षतिग्रस्त कर दिया, लेकिन एक स्थानीय निवासी की सतर्कता ने एक बड़े हादसे को टाल दिया. इस घटना ने रेलवे प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच आपसी तालमेल का महत्व बताया है.
लगातार मूसलाधार बारिश के कारण शम्नापुर रेलवे ब्रिज के नीचे बाढ़ का पानी तेजी से बह रहा था. इस प्रचंड जलप्रवाह ने रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी और कंकड़-पत्थरों को बहा दिया, जिससे ट्रैक हवा में तारों की तरह लटक गया. इस खतरनाक स्थिति को स्थानीय निवासी शेखर ने समय रहते देख लिया. उन्होंने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और रेलवे अधिकारियों को दी.
अक्कन्नपेट-मेदक मार्ग पर रेल सेवाएं तुरंत रोक दी गईं
शेखर की सूचना पर रेलवे प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिकंदराबाद-निजामाबाद और अक्कन्नपेट-मेदक मार्ग पर रेल सेवाएं तुरंत रोक दीं. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यदि यह क्षति समय पर नहीं देखी गई होती, तो एक बड़ा रेल हादसा हो सकता था, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान संभव था.
रेलवे की तकनीकी टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त ट्रैक की मरम्मत शुरू की. अधिकारियों ने बताया कि ट्रैक के नीचे की मिट्टी और कंकड़ को पुनः स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है, और जल्द ही रेल सेवाएं बहाल की जाएंगी. इस घटना ने बरसात के मौसम में रेलवे ट्रैकों की नियमित निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है.
शेखर की सतर्कता ने बचाई लाखों जानें
स्थानीय लोगों ने शेखर की सतर्कता की जमकर प्रशंसा की. एक अधिकारी ने कहा, “शेखर की जागरूकता ने न केवल एक बड़ा हादसा टाला, बल्कि कई जिंदगियां भी बचाईं.” यह घटना स्थानीय समुदाय और प्रशासन के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रेरणा देता है.
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