Investigation of Somi-Upreda culvert accident in Chittorgarh | गूगल-मैप में अपडेट नहीं हुई…

चित्तौड़गढ़ में गूगल मैप के भरोसे घर जा रहा परिवार 3 दिन पहले बनास नदी की टूटी पुलिया में बह गया था। हादसे के 72 घंटे बाद भी न गूगल मैप में उस रास्ते को नॉर्मल ही बताया जा रहा है।
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इस हादसे में वैन में सवार 9 लोग बह गए थे, जिनमें 3 की मौत हो गई है। वहीं, एक 4 साल की बच्ची अब तक लापता है। राजस्थान में इसे गूगल मैप की गलती से हुआ अब तक का सबसे बड़ा हादसा माना जा रहा है।
क्या गूगल मैप ने वैन को 3 साल से बंद पड़ी टूटी पुलिया तक पहुंचाया? हादसे के 12 घंटे बाद भास्कर टीम इसका सच जानने निकली।
हमने वही रूट चुना, जिसके जरिए मंगलवार की रात 1 बजे चित्तौड़गढ़ का वो परिवार जा रहा था और हादसे का शिकार हो गया। साथ ही इस हादसे में जिंदा बचे शख्स से बातचीत कर हकीकत को जाना। पढ़िए- पूरी ग्राउंड रिपोर्ट….
जहां से कार नदी में गिरी, गूगल मैप ने भास्कर टीम को उसी जगह पहुंचाया
चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर के कानाखेडी गावं का एक परिवार मंगलवार की रात आसींद (भीलवाड़ा) में स्थित सवाई भोज मंदिर दर्शन करके वैन में लौट रहा था। वैन में परिवार के नौ सदस्य सवार थे। जिसमें मदन (25), हितेश (16), लीला (18), 21 साल की चंदा, ममता (25), खुशी (4), काव्यांश (9 माह), आयांश (9 माह) और 6 साल की रुत्वी शामिल थे। वैन मदन चला रहा था। लौटते समय मदन ने कारोई से कानाखेड़ी वाला रास्ता चुना था। इस रूट में गूगल मैप उन्हें टूटी पुलिया तक ले गया। वैन नदी में गिर गई।
इस ग्राफिक से समझिए हादसा कैसे हुआ…
घटना के बाद बुधवार की दोपहर भास्कर टीम भी ने भीलवाड़ा से गूगल मैप ऑन किया और वही रूट सेट किया। हमें यह देखना था कि गूगल मैप की आखिर कौनसी गलती से इतना बड़ा हादसा हुआ। महज आधे घंटे में कारोई से करीब 20 किलोमीटर दूर हम सांखली पुलिया पर पहुंचे।
भास्कर रिपोर्टर ने मैप में रूट सेट किया और हादसे वाली जगह के लिए रवाना हुए।
वहां मौजूद लोगों ने बताया कि यहां दिन में रास्ता खुला रहता है। लेकिन रात में सांखलिया डैम से पानी छोड़े जाने के कारण इसे बंद कर दिया जाता है। यही कारण था कि मंगलवार की रात करीब 1 बजे वैन चला रहा मदन अपने परिवार के 9 लोगों के साथ जब यहां पहुंचा तो उसे पुलिया बंद मिली थी।
सांखली पुलिया पर दिन में पानी की रपट के बावजूद लोगों की आवाजाही जारी थी।
जानकारी के मुताबिक मदन ने अपने गांव कानाखेड़ी पहुंचने के लिए गूगल मैप पर शॉर्ट रास्ता ढूंढा। मैप ने उसे सांखली पुलिया से महज 500 मीटर पहले सोमी-उपरेड़ा पुलिया का रास्ता दिखाया।
हमने भी जब सांखली पुलिया पर खड़े होकर गूगल मैप से कानाखेड़ी गांव पहुंचने का दूसरा रास्ता चेक किया तो उसमें सोमी-उपरेड़ा दिख रहा था।
ये वही रास्ता है जिस पर चलते हुए परिवार उस टूटी हुई पुलिया तक पहुंचा था। हम बड़ी सावधानी के साथ गूगल मैप के जरिए सोमी गांव से होते हुए उस पुलिया के किनारे तक पहुंचे जहां हादसा हुआ था।
पड़ताल करने पहुंची टीम, हकीकत- हादसे के बाद बंद की जा रही थी पुलिया
यह पुलिया दो गांवों को जोड़ती है, सोमी और उपरोड़ा। ये करीब 800 मीटर लंबी बताई जाती है। हमने देखा 150 मीटर आगे चलते ही पुलिया बुरी तरह से टूटी हुई थी। वहां इतना बड़ा गड्ढा है कि किसी वाहन का निकल पाना असंभव है। लोगों ने बताया उफान आने पर बनास नदी का पानी पुलिया की रपट से ऊपर तक बहता है।
सोमी-उपरेड़ी पुलिया, जहां हादसा हुआ। घटनास्थल पर भीड़ जमा थी।
पुलिया से पहले ही एक तरफ मुख्यमंत्री सड़क योजना का एक बोर्ड लगा हुआ दिखा। लिखा हुआ था- पुलिया क्षतिग्रस्त है। दीवार टूटी हुई है। कृपया वाहन एक तरफ से निकालें-बरसात में आवागमन नहीं करें। लेकिन रात के अंधेरे में इस बोर्ड को देख पाना संभव नजर नहीं आता।
चौंकाने वाली तस्वीर यह थी कि पुलिया को क्षतिग्रस्त होने के बावजूद बंद नहीं किया गया था। हादसे के करीब 16-17 घंटों बाद उस पुलिया को ट्रकों की मदद से गिट्टी-पत्थर डालकर बंद किया जा रहा था।
न ही किसी तरह के बैरिकेड लगे थे और नही स्पष्ट शब्दों में कोई चेतावनी बोर्ड। जबकि राशमी थाना पुलिस यह दावा कर रही है कि पुलिया 3 साल से टूटी हुई थी और आवाजाही पूरी तरह से बंद कर रखा था।
पुलिया की एक तरफ चेतावनी बोर्ड लगा मिला। स्थानीय लोगों ने बताया रात के अंधेरे में ऐसे चेतावनी पर नजर जाए, यह जरूरी नहीं।
संभावना है कि वैन में सवार परिवार का ध्यान बोर्ड पर नहीं गया होगा। रास्ता खुला हुआ देख वे आगे बढ़ गए होंगे। हुए पुलिया में गाड़ी उतार दी।
पुलिया पर 100-150 मीटर आगे चलने पर हमने पाया कि पुलिया के बीचों बीच एक बड़ा सा गड्ढा नजर आया। रात को पानी के बहाव के कारण गड्ढा नजर नहीं आया होगा और गाडी पानी में उतर गई।
हादसा होने के बाद पुलिया पर आवाजाही रोकने के लिए रास्ते में पत्थर डालते हुए डंपर।
हादसे में जिंदा बचे शख्स ने बताई आपबीती
इस हादसे के बाद जिंदा बचे परिवार के लोग अभी तक सदमे में हैं। उनमें से एक सदस्य हितेश (16) से हमारी बातचीत संभव हो पाई। हितेश ने बताया कि देर रात हो चुकी थी। सांखली पुलिया पर पानी की तेज रपट चल रही थी। वहां लोग मिले जिन्होंने जाने से रोक दिया। ऐसे में हमने गूगल मैप लगाकर दूसरा रास्ता ट्राई किया। उसी के सहारे चले जा रहे थे। सोमी-उपरेड़ा पुलिया टूटी हुई इसकी जानकारी नहीं थी। किसी ने भी नहीं रोका था। इतनी रात में रोकता भी कौन। इसी दौरान हादसा हो गया।
ग्रामीण बोले- पहले भी हो चुका हादसा
मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों से बातचीत की। एक ग्रामीण विकल कोठारी ने बताया कि प्रशासन ने पुलिया पर कहीं भी पत्थर या बैरिकेड नहीं लगा रखे थे। जबकि आगे पुलिया बिल्कुल टूटी हुई है। एक ग्रामीण किशन ने बताया कि 2 साल पहले भी यहां एक हादसा हो चुका है। एक बाइक सवार भी गूगल मैप के जरिए इस पुलिया पर आगे बढ़ गया और नदी में गिर गया था।
किशन ने बताया कि प्रशासन सांखली पुलिया पर तो मुस्तैद रहता है। पानी छोड़ने के दौरान वहां जाने वाले वाहनों को रोका जाता है। लेकिन यहां ऐसा कोई इंतजाम नहीं है।
200 मीटर आगे फंसी कार, कार के ऊपर चढ़ने से 5 लोगों बची जान
राशमी थाने के थानाधिकारी देवेन्द्र ने बताया कि रात करीब 1.30 बजे हादसे की सूचना मिली थी। घटनास्थल पर पहुंचे तो वैन पुलिया से करीब 200 मीटर आगे किसी चीज मे अटकी हुई थी। वैन के ऊपर ही 4-5 लोग चिल्ला रहे थे। मोबाइल की टॉर्च से रोशनी दिखाकर मदद मांग रहे थे। मौके पर प्रशासन को सूचित कर रेस्क्यू ऑपरेशन चालू किया गया।
इस पूरे हादसे में 25 साल के मदन, 16 साल का हितेश, 18 साल की लीला, 9 महीने का काव्यांश, 9 महीने का आयांश बच गए हैं। ये जिंदा इसलिए बच गये क्योंकि जब कार नदी में गिरी तो ये किसी तरीके से बाहर निकलकर वैन की छत पर पहुंच गए। वहां इन्होंने दो छोटे बच्चों को गोद में ले रखा था।
21 साल की चंदा, 25 साल की ममता, चार साल की खुशी के शव घटनास्थल से काफी दूर रेस्क्यू टीमों को मिले। शवों का परिजनों को सौंप दिया गया है। अभी 6 साल की रुत्वी की तलाश जारी है।
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